Thursday, June 16, 2016

श्रीकृष्णद्वादशनामस्तोत्रं

प्रथमं तु हरिं विद्यात् द्वितीयं केशवं तथा। तृतीयं पद्मनाभं तु चतुर्थं वामनं तथा॥१॥ पञ्चमं वेदगर्भं च षष्ठं तु मधुसूदनं। सप्तमं वासुदेवं च वराहं चाष्टमं तथा॥२॥ नवमं पुण्डरीकाक्षं दशमं तु जनार्दनम्। कृष्णमेकादशं प्रोक्तं द्वादशं श्रीधरं तथा॥३॥ एतद्द्वादशनामानि मया प्रोक्तानि फाल्गुन। कालत्रये पठेद्यस्तु तस्य पुण्यफलं शृणु॥४॥ चान्द्रायणसहस्रस्य कन्यादानशतस्य च। अश्वमेधसहस्रस्य फलमाप्नोति मानवः॥५॥ ॥इति श्रीकृष्णद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम्‌॥


रोग निवारिणी स्तोत्रनी

अच्युतानन्त गोविन्द नामोच्चारण भेषजात् |नश्यन्ति सकल रोगः सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ||
A mantra for good health... Look at a glass of water, chant it 21 times & drink it. It cures many disorders.
अच्युतानन्तगोविन्द विष्णो नारायणामृत |
रोगान्मे नाशयाशेषान आशु-धन्वन्तरे हरे ||

अच्युतानन्त 
गोविन्द विष्णो धन्वन्तरे हरे | वासुदेवाखिलानस्य रोगान् नाशाय नाशाय ||

सोमनाथं वैद्यनाथं धन्वन्तरिमथाश्विनौ |
एतान् संस्मरतः प्रातः व्याधिः स्पर्श न विद्यते ||

Wednesday, April 20, 2016

बार बार दिन ये आये

बार बार दिन ये आये, बार बार दिल यह गाये 
तू जिये हज़ारों साल, यह मेरी आरज़ू है
बेक़रार होके दामन, थाम लूँ मैं किसका 

क्या मिसाल दूँ मैं तेरी, नाम लूँ मैं किसका
नहीं, नहीं, ऐसा हसीं, कोई नहीं है
जिस पे  ये नज़र रुक जाये, बेमिसाल जो कहलाये
तू जिये हज़ारों साल, यह मेरी आरज़ू है

औरों की तरह कुछ मैं भी, तोह्फ़ा ले आता 
मैं तेरी हसीं महफ़िल में, फूल ले के आता
जि  ने कहा उसे क्या है, फूलों की ज़रूरत
जो पहर खुद कहलाये, हर कली का दिल धड़काये
तू जिये हज़ारों साल, यह मेरी आरज़ू  है

फूलों  ने  चमन  से  तुझको  है  सलाम  भेजा  
तारों  ने  गगन  से  तुझको  ये  पयाम  भेजा
दुआ  है  ये  खुदा  करे  ए  शोख  तुझको
चाँद  की  उम्र  लग  जाए
आये  तो  क़यामत  आये
तू जिये हज़ारों साल, यह मेरी आरज़ू है

Friday, April 8, 2016

मैंने पूछा चाँद से

मैंने पूछा चाँद से के देखा है कहीं मेरा यार सा हसीं
चाँद ने कहा चांदनी की कसम नहीं नहीं नहीं
मैंने पूछा चाँद से
मैंने यह हिजाब तेरा ढूंढा हर जगह शबाब तेरा ढूंढा
कलियों से मिसाल तेरी पूछी फूलो ने जवाब तेरा ढूंढा
मैंने पूछा बाग़ से फलक हो या जमीं ऐसा फूल है कही
बाग़ ने कहा हर काली की कसम नहीं नहीं नहीं
मैंने पूछा चाँद से

हो चाल है के मौज की रवानी जुल्फ है के रात की कहानी
होठ हैं के आईने केवल के आँख है के मयकदो  की रानी
मैंने पूछा जाम से फलक हो या जमीं ऐसी 
मय  भी है कहीजाम ने कहा महकशी की कसम नहीं नहीं नहीं
खूबसूरती जो तूने पाई लूट गयी खुदा की बस खुदाई 
मीर के गझल कहु तुझे मैं या कहु खैय्याम की रुबाईमैं जो पूछूं शायरो से ऐसा दिल नशि कोई शेर है कही
शायर कहे शायरी की कसम नहीं नहीं नहीं

Thursday, April 7, 2016

कैसे मुझे तुम मिल गयी

कैसे मुझे तुम मिल गयी किस्मत पे आये न यकीन
 उतर आई झील में जैसे चाँद उतरता है कभी
 हौले हौले
धीरे से गुनगुनी धूप की तरह से तरन्नुम मैं तुम छूके मुझे गुजारी हो यु
देखु तुम्हे या मैं सुनु
तुम हो सुकून तुम हो जूनून
 क्यों पहले न आई तुम
मैं तो यह सोचता था के आज कल उपरवाले को फुर्सत नहीं
 फिर भी तुम्हे बनाके वह मेरी नज़र में चढ़ गया रुतबे मैं वह और बढ़ गया
बदले रास्ते झरने और नदी बदले दिप की टीम टीम छेड़े ज़िन्दगी धुन कोई नयी बदली बरखा की रिमझिम

बदलेंगी ऋतुएं अदा पर मैं रहूंगी सदा उसी तरह तेरी बाहों में बहे डालके हर लम्हा हर पल

जिंदगी सितार हो गई रिम झिम मल्हार हो गई मुझे आता नहीं किस्मत पे अपनी यकीन कैसे मुझको मिल गयी तुम

Sunday, March 20, 2016

किसका चेहरा, अब मैं देखूं

चाँद भी देखा, फूल भी देखा 
बादल, बिजली, तितली, जुगनू 
कोई नहीं है ऐसा, तेरा हुसन है जैसा 

मेरी निगाह ने ये कैसा ख्वाब देखा है 
ज़मीं पे चलता हुआ महताब देखा है 
मेरी आँखों ने चुना है तुझको, दुनिया देखकर 
किसका चेहरा, अब मैं देखूं, तेरा चेहरा देखकर 

नींद भी देखी, ख्वाब भी देखा 
चूड़ी, बिंदिया, दर्पण, खुशबू 
कोई नहीं है ऐसा, तेरा प्यार है जैसा 
मेरी आँखों ने चुना है...

रंग भी देखा, रूप भी देखा 
रस्ता, मंजिल, साहिल, महफ़िल 
कोई नहीं है ऐसा, तेरा साथ है जैसा 
मेरी आँखों ने चुना है...

बहुत खूबसूरत है आँखें तुम्हारी 
बना दीजिये इनको, किस्मत हमारी 
उसे और क्या चाहिए ज़िन्दगी में 
जिसे मिल गयी है मोहब्बत तुम्हारी 
मेरी आँखों ने चुना है...

कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….

कैसे बताऊँ मैं तुम्हें…. मेरे लिये तुम कौन हो……
कैसे बताऊँ !!!  कैसे बताऊँ मैं तुम्हें
तुम धड्कनॊं का गीत हो, जीवन का संगीत हो!
तुम जिन्दगी, तुम बन्दगी ! तुम रोशनी, तुम ताजगी!
तुम हर खुशी, तुम प्यार हो ! तुम प्रीत हो, मनमीत हो !
आँखों में तुम, यादों में तुम ! साँसों में तुम, आहों में तुम !
नींदों में तुम, ख्वाबों में तुम ! तुम हो मेरी हर बात में…
तुम हो मेरे दिन रात में ! तुम सुबह में तुम शाम में !
तुम सोच में तुम काम में !

मेरे लिये पाना भी तुम ! मेरे लिये खोना भी तुम !
मेरे लिये हँसना भी तुम ! मेरे लिये रोना भी तुम !……… और जागना सोना भी तुम !!!

जाऊँ कहीं देखूँ कहीं… तुम हो वहाँ…तुम हो वहीं !
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें…….. तुम बिन तो मैं कुछ भी नहीं !!!
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम कौन हो !!!
ये जो तुम्हारा रूप है…ये जिन्दगी की धूप है !
चन्दन से तरसा है ये बदन …बहती है ईसमें एक अगन !
ये शोखियाँ ये मस्तियाँ …. तुमको हवाओं से मिली !
जुल्फ़ें घटाओं से मिली !
होठों में कलियाँ खिल गयीं….. आखों को झीलें मिल गयीं !

चेहरे में सिमटी चाँदनी….. आवाज में है रागिनी !
शीशे के जैसा अंग है…फ़ूलों के जैसा रंग है !
नदियों के जैसी चाल है… क्या हुस्न है ..क्या हाल है !!!
ये जिस्म की रंगीनियाँ…… जैसे हजारों तितलियाँ !
बाहों की ये गोलाईयाँ…. आँचल में ये परछाईयाँ !!!
ये नगरियाँ हैं ख्वाब की…..कैसे बताऊँ मैं तुम्हें..हालत दिल – ऎ – बेताब की !!!
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम कौन हो !!!
कैसे बताऊँ….कैसे बताऊँ….
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम धरम हो !!!
मेरे लिये ईमान हो !
तुम ही ईबादत हो मेरी…… तुम ही तो चाहत हो मेरी !
तुम ही अरमान हो मेरा !
तकता हूँ मैं हर पल जिसे.. वही तो तस्वीर हो तुम.
तुम ही मेरी तकदीर हो.
तुम ही सितारा हो मेरा…. तुम ही नजारा हो मेरा.
यूँ ध्यान में मेरे हो तुम..जैसे मुझे घेरे हो तुम.
पूरब में तुम, पश्चिम में तुम!!!….उत्तर में तुम, दक्षिण में तुम !!!
सारे मेरे जीवन में तुम.
हर पल में तुम…हर छिन में तुम !!!
मेरे लिये रस्ता भी तुम…. मेरे लिये मन्जिल भी तुम.
मेरे लिये सागर भी तुम..मेरे लिये साहिल भी तुम.
मैं देखता बस तुमको हूँ….मैं सोचता बस तुमको हूँ.
मैं जानता बस तुमको हूँ… मैं मानता बस तुमको हूँ.
तुम ही मेरी पहचान हो…!!!
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें…. देवी हो तुम मेरे लिये.
मेरे लिये भगवान हो !!!
कैसे बताऊँ मैं तुम्हें….मेरे लिये तुम कौन हो !!!
कैसे……….. ????